बाबा तेरी किरपा से साँसे मेरी चलती है

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॥ पावन पाठ ॥

बाबा तेरी किरपा से साँसे मेरी चलती है,

तू है तो मेरा जीवन चिडियों सा चेह्क ता है,

फूलो सा हस्ता है कलियों सा मेहक ता है,

बाबा तेरी किरपा से साँसे मेरी चलती है,

विश्वास है जीवन भर तू मुझको सम्बालेगा,

डूबूगा भवर में जो तू आके बचा लेगा

बाबा तेरी किरपा से साँसे मेरी चलती है,

ऐसे ही रहे हर दम ये ध्यान तेरा मुझ पर

मैं मान रहा हु है एहसान तेरा मुझ पर

बाबा तेरी किरपा से साँसे मेरी चलती है,

गुरु मेरे ब्रह्मा है गुरु मेरे विष्णु है

गुरु मेरे शिव भोले जिहने जगत रचाया है

गुरु जी की कुटिया को मैंने फूलो से सजाया है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।