जप राम राम बिना कोई न अपना

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जप राम राम बिना कोई न अपना

ओ सुन मेरिये जिन्दे राम बना लै अपना

जप राम राम बिना कोई न अपना

किथे गए तेरे धिया पुत्र जिहना दा बनिया तू मित्र,

ओ सुन मेरिये जिंदे नाल किसे नहियो जाना

जप राम राम बिना कोई न अपना

किथे गए तेरे साक संबंदी जिहना दा बनिया तू संगी

ओ सुन मेरिये जिन्दे नाल किसे नहियो जाना

जप राम राम बिना

किथे गए तेरे मेहल चुबारे एथे ही रेह जाने सारे

ओ सुन मेरिये जिन्दे नाल किसे नहियो जाना

जप राम राम बिना कोई न अपना ...

"ਜਪ ਰਾਮ, ਰਾਮ ਬਿਨਾਂ ਕੋਈ ਨਾ ਆਪਣਾ" xll -ll

ਓ ਸੁਣ ਮੇਰੀਏ ਜਿੰਦੇ, ਰਾਮ ਬਣਾ ਲੈ ਆਪਣਾ xll,,,

ਜਪ ਰਾਮ, ਰਾਮ ਬਿਨਾਂ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

ਕਿੱਥੇ ਗਏ ਤੇਰੇ ਧੀਆਂ ਪੁੱਤਰ, ਜਿਹਨਾਂ ਦਾ ਬਣਿਆ ਤੂੰ ਮਿੱਤਰ ll

ਓ ਸੁਣ ਮੇਰੀਏ ਜਿੰਦੇ, ਨਾਲ ਕਿਸੇ ਨਹੀਓਂ ਜਾਣਾ xll,,,

ਜਪ ਰਾਮ, ਰਾਮ ਬਿਨਾਂ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

ਕਿੱਥੇ ਗਏ ਤੇਰੇ ਸਾਕ ਸੰਬੰਧੀ, ਜਿਹਨਾਂ ਦਾ ਬਣਿਆ ਤੂੰ ਸੰਗੀ ll

ਓ ਸੁਣ ਮੇਰੀਏ ਜਿੰਦੇ, ਨਾਲ ਕਿਸੇ ਨਹੀਓਂ ਜਾਣਾ xll,,,

ਜਪ ਰਾਮ, ਰਾਮ ਬਿਨਾਂ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

ਕਿੱਥੇ ਗਏ ਤੇਰੇ ਮਹਿਲ ਚੁਬਾਰੇ, ਏਥੇ ਹੀ ਰਹਿ ਜਾਣੇ ਸਾਰੇ ll

ਓ ਸੁਣ ਮੇਰੀਏ ਜਿੰਦੇ, ਨਾਲ ਕਿਸੇ ਨਹੀਓਂ ਜਾਣਾ xll,,,

ਜਪ ਰਾਮ, ਰਾਮ ਬਿਨਾਂ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

ਅਪਲੋਡਰ- ਅਨਿਲਰਾਮੂਰਤੀਭੋਪਾਲ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।