है तीनो लोको में हो रही माँ की जय जय कार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

है तीनो लोको में हो रही माँ की जय जय कार

माँ हर इक मन में बस्ती है भगतो पे करे उपकार

है तीनो लोको में हो रही माँ की जय जय कार

हर रोज सुबह माँ के चरणों में सूर्ये देव परनाम करे

करने को माँ पूजा अर्चन चाँद सितारे धाम खड़े

है आठो पेहर लगे दर पे तेरे भगतो की कतार

वो किस्मत वाले होते है जो आते है दरबार

है तीनो लोको में हो रही माँ की जय जय कार

लाल चुनरिया कोई लाया मैया को सजाने को

भेट नारियल कोई लाया चरणों में चडाने को

करेगी मैया हर भगतो के सपनो को साकार

लगा रहे है सारे मिल कर मैया के जय कार

है तीनो लोको में हो रही माँ की जय जय कार

भरे है मटको ममता से दर्शन पाने मैया के

झूम झूम के नाच रहे है सभी दीवाने मैया के

है बाजे ढोल नगाड़े मेरी मैया के दरबार

है स्वगो से भी सुंदर लागे मन को अजीत के

मेरी मैया का दरबार

है तीनो लोको में हो रही माँ की जय जय कार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।