प्यासी मर गई लांगुरिया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मर गयी लांगुरिया

मैं प्यासी मर गयी लागुरिया

रे कुल्लड़ रे कुल्लड़

कुल्लड़ फूट गयौ मोंटर मे

प्यासी मर गई लांगुरिया

कुल्लड़ फूट गयौ मोंटर मे

प्यासी मर गई लांगुरिया

मर गयी लांगुरिया

में प्यासी मर गयी लागुरिया

रे कुल्लड़ रे कुल्लड़

फूट गयौ मोंटर मे

प्यासी मरि गई लांगुरिया

सास बिटौरा चढ़ गई

और ससुरा जोरै हाथ

सास बिटौरा चढ़ गई

मेरा सुसुरा जोड़े हाथ

उतर उतर परमेश्वरी

उतर उतर परमेश्वरी

मैनें तोई पै बोली जात

रे कुल्लड़ रे कुल्लड़

फूट गयौ मोंटर मे

प्यासी मरि गई लांगुरिया

कुल्लड़ फूट गयौ मोंटर मे

प्यासी मर गई लांगुरिया

जिठनी बिटौरा चढ़ि गई

मेरौ जेठा जोरै हाथ

उतरि उतरि परमेश्वरी

मैनें तोई पै बोली जात

रे कुल्लड़ रे कुल्लड़

फूट गयौ मोंटर मे

प्यासी मरि गई लांगुरिया

कुल्लड़ फूट गयौ मोंटर मे

प्यासी मर गई लांगुरिया

द्यौरानी बिटौरा चढ़ि गई

मेरौ देवर जोरै हाथ

उतरि उतरि परमेश्वरी

मैनें तोई पै बोली जात

रे कुल्लड़ रे कुल्लड़

फूट गयौ मोंटर मे

प्यासी मरि गई लांगुरिया

कुल्लड़ फूट गयौ मोंटर मे

प्यासी मर गई लांगुरिया

नन्द बिटौरा चढ़ि गई

नन्देऊ जोरै हाथ

उतरि उतरि परमेश्वरी

मैनें तोई पै बोली जात

रे कुल्लड़ रे कुल्लड़

फूट गयौ मोंटर मे

प्यासी मरि गई लांगुरिया

कुल्लड़ फूट गयौ मोंटर मे

प्यासी मर गई लांगुरिया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।