दुःख से न गबरा प्यारे होंगे तेरे वारे न्यारे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

दुःख से न गबरा प्यारे होंगे तेरे वारे न्यारे

जग से नाता तोड़ दे तू सब साईं पे छोड़ दीवाने सब साईं पे छोड़ दे,

माना तेरे करीब में है गम के अँधेरे

जीवन में आये खुशियों के सवेरे

तू सब साईं पे छोड़

दामन सभी का भरते है राजा या रंक है

बाबा की किरपा सारे भगतो के संग है

तू सब साईं पे छोड़

बाबा के ही चरणों से तो संसार पला है

साईं का भरोसा ही जमाने से बड़ा है

तू सब साईं पे छोड़

हो जा तू साईं बाबा का हर दुःख मिटाए गे

तकदीर की सितारे तेरे जगमगाए गे

तू सब साईं पे छोड़

जिसने मेरे बाबा को है मुश्किल में पुकारा

साईं ने वही आके उसको दिया सहारा

तू सब साईं पे छोड़

बच्चो पे कर्म उसका मेहरबा की तरह है

साईं की प्यार दुनिया में इक माँ की तरह है

तू सब साईं पे छोड़

साईं है जिसके पास खुदा उसके साथ है

साईं के दर से बनती जमाने की बात है

तू सब साईं पे छोड़

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।