राह निहारे भक्त तुम्हारे कर जोडे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जय जय शंकरा, जय जय शंकरा ,

राह निहारे भक्त तुम्हारे कर जोडे तेरे द्वार,

आजा महाकाल आजा, उज्जैन नगरी के राजा,

हाथ में डमरू शंख विशाला, भोले नाथ का रूप निराला,

डम डम बाज रहा डमरू, भोले नाथ का बाजा ,

आजा महाकाल आजा, उज्जैन नगरी के राजा,

लाई है तकदीर मुझे, तेरे ही दर पर,

न भटकेगे न जाऐगे , किसी और के दर पर

जय महाकाल जय महाकाल जय जय महाकाल

जय महाकाल जय महाकाल जय जय महाकाल

लाई है तकदीर मुझे, तेरे ही दर पर

न भटकेगे न जाऐगे , किसी और के दर पर

दर्शन को तेरे आये है , हम तेरे ही घर पर ,

आजा महाकाल आजा, उज्जैन नगरी के राजा

तू त्रिलोकी तू अविनाशी, तू भोला भंडारी,

तू कैलाशी तू बिषधारी , बाघम्बर त्रिपुरारी,

जय महाकाल जय महाकाल जय जय महाकाल,

जय महाकाल जय महाकाल जय जय महाकाल

तू त्रिलोकी तू अविनाशी, तू भोला भंडारी

तू कैलाशी तू बिषधारी, बाघम्बर त्रिपुरारी

तुम हो कालो के भी काल, उज्जैन नगरी के राजा,

आजा महाकाल आजा, उज्जैन नगरी के राजा ,

रूप तेरा रौद्र है, तू भस्म को ओडे हुये,

तू काल का है देवता, तू नाचे तो ये जग हिले,

तू नाचे तो ये जग हिले, तू नाचे तो ये जग हिले,

आरंभ तू और अंत तू, तू दुनिया का आधार है

तू दुनिया का आधार है ,

तू जिसपे हो प्रसन्न मानो उसका उधार हैंं,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।