साँवरिया मन भाय गयो री

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

साँवरिया, मन भाय गयो री, xll -ll

साँवरिया, मेरो साँवरिया, xll

साँवरिया, मन भाय,,,,,,,,,,,,,,,,

मुख से बोले, मीठी बानी ll

मधुर बोल, सुनाए गयो री,

साँवरिया, मन भाय गयो री ll

साँवरिया, मन भाय,,,,,,,,,,,,,,,,

यमुना तट पे, रास रचावे ll

प्यारी मुरली, सुनाए गयो री,

साँवरिया, मन भाय गयो री ll

साँवरिया, मन भाय,,,,,,,,,,,,,,,,

जब से देखी मैंने, साँवरी सूरत ll

दिल में मेरे, समाए गयो री,

साँवरिया, मन भाय गयो री ll

साँवरिया, मन भाय,,,,,,,,,,,,,,,,

चरण पकड़वा ते, किरपा मांगी ll

अपनों प्यार, लुटाए गयो री,

साँवरिया, मन भाय गयो री ll

साँवरिया, मन भाय,,,,,,,,,,,,,,,,

मेरो साँवरिया,,,,,,,,,धुन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।