अरे हंसला रे चुगले चुगले मोतीड़ा रो चून

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॥ पावन पाठ ॥

अरे हंसला रे चुगले चुगले मोतीड़ा रो चून,

कोई मोतीड़ा रो चून कांकरिया चुगना छोड़ दे,

अरे हंसला रे चुगले चुगले मोतीड़ा रो चून,

कोई मोतीड़ा रो चून कांकरिया चुगना छोड़ दे,

अरे हँसला रे बोली बोली कोयल जेड़ा बोल,

कोई कोयल जैड़ा बोल कागा री बोली छोड़ दे,

हँसला रे चाली चाली हंसले वाली चाल,

बगुलां री चाली छोड़ दे अरे हंसला रे, चुगले चुगले,

मोतीड़ा रो चून कोई मोतीड़ा रो चून,

कांकरिया चुगना छोड़ दे,

हंसला रे जीवनो जीवनो जग में दिनड़ा चार,

कोई जुग में दिनड़ा चार माला फेरो हरी रे नाम की,

अरे हँसला रे आयो आयो सावणियै रो मास,

कोई सावणियै रो मास भादवो केडो गाजियों रे,

अरे हंसला रे, चुगले चुगले मोतीड़ा रो चून,

कोई मोतीड़ा रो चून कांकरिया चुगना छोड़ दे,

अरे हँसला रे बरसे बरसे, मेहड़लो मझधार,

कोई मेहड़लो मझधार हां भरिया रे नाडी नाडिया,

हंसला रे, लेवणो लेवणो राम जी रो नाम,

कोई राम जी रो नाम भजना री बांधो गांठड़ी,

अरे हंसला रे, चुगले चुगले मोतीड़ा रो चून,

कोई मोतीड़ा रो चून कांकरिया चुगना छोड़ दे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।