शंकर मेरे जगत पिता है

पारंपरिक
महादेव आरती शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शंकर मेरे जगत पिता है पारवती मेरी माता

दर तेरे आता हूँ आरती गाता हूँ,

चरणों में तेरे धोक लगाऊं दर्श तेरा मैं चाहता,

क्यों ना तरस तुझे आता,

तुम बिन मेरा कौन सहारा,

पार्वती मेरी माता..........

अवगुण चित ना धरो सिर पर हाथ धरो,

मैं हूँ पापी और दुष्कर्मी खोल ना मेरा खाता,

सुनले जग के विधाता मेरी नैया डगमग डोले,

क्यों नहीं पार लगाता,

पार्वती मेरी माता........

धीर बंधाओ ना हाथ फिराओ ना,

नैनो से बहे जल की धारा,

क्यों ना तरस तुझे आता,

मुझसे नहीं क्या नाता,

किस दर जाऊं किसको सुनाऊँ,

दुःख से भरी ये गाथा पार्वती मेरी माता,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।