मैं हारी दुखयारी शनि देवा

पारंपरिक
शनि देव भजन शनि देव भजन shani
॥ पावन पाठ ॥

मैं हारी दुखयारी शनि देवा करो किरपा मेरे शनि देवा

ओ मेरे देवा ओ शनि देवा

मैं तो घूमी दर बदर कोई आये न नजर,

सीवा तेरे मेरे शनि देवा,

मैं हारी दुखयारी शनि देवा करो किरपा मेरे शनि देवा

आँखे तरस गई राह तकते तेरी,

अब तो सुन लो अरज शनि देवा,

मैं हारी दुखयारी शनि देवा करो किरपा मेरे शनि देवा

कर्मो से हारी मैं इक दुखयारी मैं

लाज रखलो मेरी शनि देवा

मैं हारी दुखयारी शनि देवा करो किरपा मेरे शनि देवा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।