आवणों पडैला सतगुरु

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन गुरुदेव भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

गुरु गोविंद दोनों खड़े मैं काके लागू पाय,

बलिहारी गुरु देव आपने जो गोविन्द दियो मिलाय,

आवणों पडैला सतगुरु/गुरुजी आवणों पडैला,

आज री सतसंग में थानें आवणों पडैला।

पहला जुगा में राजा प्रहलाद आया,

पाँच करोड़ तपसी तारणा पड़ेला,

आज री सतसंग में थानें आवणों पडैला,

दूजा रे जुगा में राजा हरिचन्द्र आया,

सात करोड़ तपसी तारना पड़ेला,

आज री सतसंग में थानें आवणों पडैला,

तीजा जुगा में राजा जैठल आया,

नव करौड़ तपसी तारना पड़ेला,

आज री सतसंग में थानें आवणों पडैला,

आज री सतसंग में थानें पधारणों पडैला,

चौथा जुगा में राजा बलीचंद आया,

बारह करोड़ तपसी तारना पड़ेला,

आज रे जागरण में थानें आवणों पडैला,

आज री सतसंग में थानें पधारणों पडैला,

चारो जुगां रा मंगल रूपा दे गावै,

थाली में बाग़ लगावनो पड़ेला,

आज रे जागरण में थानें आवणों पडैला,

आज री सतसंग में थानें पधारणों पडैला,

आवणों पडैला गुरूजी आवणों पडैला,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।