साईं तू सब से बड़ा है

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॥ पावन पाठ ॥

साईं तू सब से बड़ा है दाता तू सब से बड़ा है,

करुना का सागर तू ममता की मूरत मांगे तू सब का भला है

साईं तू सब से बड़ा है दाता तू सब से बड़ा है,

दुखी निमानो का तू है सहारा दर पे जो आये वो तेरा दुलारा,

तेरी शरन में आकर एह दाता मिल जाने खुदा है

साईं तू सब से बड़ा है दाता तू सब से बड़ा है,

सादे है वस्र्थ तेरा सादा है खाना

जीने का ढंग तेरा सब से निराला

भोला जो तूने वो पूरा हुआ है

तू ऐसा देवता है

साईं तू सब से बड़ा है दाता तू सब से बड़ा है,

पानी से दीप जलाए जैसे पल में अँधेरा दिलो का मिटा दे तू थल से,

श्रदा सबुरी है जिस जन में

करता तू उस पे किरपा है

साईं तू सब से बड़ा है दाता तू सब से बड़ा है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।