ये सब खेल उसी का है

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

इस संसार की गतिविधियों पर नही अधिकार किसी का है

जिसको हम परमात्मा कहते ये सब खेल उसी का है

राम सिया राम राम सिया राम राम सिया राम.

छणभर को भी नहीं छोड़ता सदा हमारे साथ में हैं

काया की स्वासा डोरी का तार उसी के हाथ में है

हंसना-रोना जीना मरना सब उसकी मर्जी का है

जिसको हम परमात्मा कहते यह सब खेल उसी का है

राम सिया राम राम सिया राम राम सिया राम.

निर्धन धनी धनी हो निर्धन ग्यानी मूढ मूरख ग्यानी,

सब कुछ अदल बदल देने में कोई नहीं उसका सानी

समझदार भी समझ सके ना ऐसा अजब तरीका है

जिसको हम परमात्मा कहते यह सब खेल उसी का है

राम सिया राम राम सिया राम राम सिया राम.

मिट्टी काली पीली हरे बन् आसमान का रंग नीला

सूर्य सुनहरा चन्द्रमा शीतल सब कुछ उसकी ही लीला

सबके भीतर स्वयं छिप गया सृजनहार सृष्टि का है

जिसको हम परमात्मा कहते यह सब खेल उसी का है

राम सिया राम राम सिया राम राम सिया राम.

राजेश्वर आनंद अगर सुख चाहो तो मानो शिक्षा

तज अभिमान मिला दो उसकी इच्छा में अपनी इच्छा

यही भक्ति का भाव है प्यारे सूत्र यही मुक्ती का है

जिसको हम परमात्मा कहते यह सब खेल उसी का है

राम सिया राम राम सिया राम राम सिया राम.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।