ठहरी नहीं ये उम्र भी ढलती चली गयी

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

ठहरी नहीं ये उम्र भी ढलती चली गयी,

आदत पुरानी लीक पे चलती चली गयी,

हम चाहते थे होवे हरी की उपासना,

दिन रात मगर वासना छलती चली गयी,

दुनिया में दिखा सब कुछ लेकिन मिला न कुछ,

बेबस जवानी हाथ भी मलती चली गयी,

सोचा था संभल जायेंगे सुधरेंगे मगर फिर,

गलती पे गलती बस होती चली गयी,

राजेश्वर श्री राम की जिनपे हुई कृपा,

केवल उन्ही की ज़िन्दगी फलती चली गयी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।