सुन दादी सुन दादी मनोहार लाई हु

पारंपरिक
अन्य भजन रानी सती दादी भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

सुन दादी सुन दादी मनोहार लाई हु

दूर सु माँ चाल के दरबार आई हु

यु तो मेरो थे सविकारो मेरे घर में आन पधारो

लाडो की सुनी सुनी कुट्टिया ने माँ आज सवारों

चरना में मैं पुकार लाई हु

दूर सु माँ चाल के दरबार आई हु

घर में थारे आने सु माँ दुःख संकट मेरा कटजा सी

थारे चरना की धूलि सु बिगड़ा काम मेरा बन जा सी

अर्जी ले थारे द्वार आई हु

दूर सु माँ चाल के दरबार आई हु

पग पे रा सु थारे दादी मेरी भी किस्मत खुल जावे

हर्ष मेरी अटक्यो गाडी बिन धक्के ही हिमाचल जावे

आजा माँ आजा माँ गनों प्यार ल्याई हु

दूर सु माँ चाल के दरबार आई हु

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।