मुझे जीने का शौक नहीं जीता हूँ खाटू आने को

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मुझे जीने का शौक नहीं जीता हूँ खाटू आने को

हाल दिल का सुनाने को ..........

हाल दिल का सुनाने को तुझे अपना बनाने को

मुझे जीने का शौक नहीं ...............

लाखों ने करोड़ो ने खुशियां दर से तेरे पाई

बाबा तेरा दीवाना हूँ तुझे याद मेरी ना आई

क्या तूने भुला डाला ........

क्या तूने भुला डाला अपने इस दीवाने को

मुझे जीने का शौक नहीं ...............

मैं भी दर पे तेरे आऊंगा श्याम मेरा है ये सपना

दूर तुझसे ना जाऊंगा इक तू ही तो है अपना

रहना पाऊं बिना तेरे मतलब के ज़माने में

मुझे जीने का शौक नहीं ...............

जिसको मिल जाए तेरी शरण हारे ना वो हराये से

जिसपे रेहमत तेरी सांवरे डरे न वो डराए से

जय कौशिक भी आएगा ..........

जय कौशिक भी आयेगा चरणों में सर झुकाने को

मुझे जीने का शौक नहीं ...............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।