सब की सुनने वाले भोले मेरी तो सुनता नहीं

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले भंडारी शंकर, भक्तन हितकारी शंकर, ले ले तू अपनी शरण,

आया भिखारी दर पे, झोली पसारे दर पे, सच्ची है मन में लगन ,

अर्जी है मेरी, मर्जी है तेरी सबकी सुनने वाले भोले मेरी तो सुनता नहीं

ना मांगू सोना चांदी,ना मांगू हीरे मोती,ये मेरे किस काम के,

चरणों की धूल दे दे, अच्छे वसूल दे दे, चाहे तेरे नाम के,

अर्जी है मेरी, मर्जी है तेरी सबकी सुनने वाले भोले मेरी तो सुनता नहीं

वापस ना जाऊंगा मैं,धूणी रमाउंगा मैं, मरना तेरे नाम पर

झोली तू भर दे भोले,मेरी तू सुनले भोले जीना तेरे नाम पर

अर्जी है मेरी, मर्जी है तेरी सबकी सुनने वाले भोले मेरी तो सुनता नहीं

अदभुत है तेरी माया, जो भी शरण में आया,बेड़ा तू पार लगाता है

जी डी शर्मा का गाना, सुनने को सब ही आना, चरणों में शीश झुकाता है

अर्जी है मेरी, मर्जी है तेरी सबकी सुनने वाले भोले मेरी तो सुनता नहीं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।