जिसने की उपासना निशिदिन

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जिसने की उपासना निशिदिन, ज्ञान, ध्यान सत्काम की।

शुद्ध हृदय से, मुक्त कंठ से, जय बोलो श्रीराम की।

भव-भयहारी, जन-हितकारी, ज्योति जलाई ज्ञान की,

प्रेम-प्रीति का बिरवा रोपा, जड़ काटी अभिमान की,

जिसने रक्षा की आजीवन, धर्म-कर्म-ईमान की,

जिसने डाली नींव अलौकिक, भक्ति-शक्ति-बलिदान की,

जिसने छुई न सपने में भी कौड़ी कभी हराम की।

शुद्ध हृदय से, मुक्त कंठ से, जय बोलो श्रीराम की।

दुष्प्रवृत्तियों के घेरे को ध्वस्त किया तप-त्याग से,

रहे सदैव सचेत हृदय से, काम-क्रोध की आग से,

भूले भटके राहगीर को, राह बताई प्रेम से,

जड़-विमूढ़ को गले लगाकर, पाठ पढ़ाया प्रेम से,

दूर हटाई गहन उदासी, गली-गली हर ग्राम की।

शुद्ध हृदय से, मुक्त कंठ से, जय बोलो श्रीराम की।

मर्यादा का कभी उल्लंघन किया नहीं अनजान में,

तन-मन-धन से रहे सदा रत, नवयुग के निर्माण में,

धार मोड़ दी आत्म-शक्ति से, हिंसा के हथियार की,

द्वेष-घृणा के अंगारों पर, प्रेमामृत बौछार की,

परहित में ही लगे रहे नित, फिकर न की धन-धाम की।

शुद्ध हृदय से, मुक्त कंठ से, जय बोलो श्रीराम की।

|Yogesh Tiwary

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।