हर बार तेरे दर आयी माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हर बार तेरे दर आयी माँ

पर टेर ना मेरी तूने सुनी

माँ जब जब नवरात्रे आते है,

बड़े प्रेम से तुमको बुलाती हु

दरवाजे खड़ी में रोज रोज,

माँ बाट तुम्हारी निहारती हु

माँ कैसे रस्ता भूल गई में ध्यान लगाए रहती हूँ....

धनवान तेरे दर आते माँ बड़ी बड़ी भेट चढ़ाते है

कोई भर भर थाल मानते है कोई चुनरी लाल ओढाते है

में भजन सुनाके मनाऊ माँ तेरी आस लगाए बैठी हूँ,

जीवन में बड़ा अंधकार है माँ ना कोई राह सूझती है

तेरी बेटी भटके दर दर माँ देहलीज़ ना कोई दीखती है

अब आके धीर बंधा जा माँ झोली फैलाये बैठी हूँ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।