बूहे मंदिरा दे खोल अज माये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बूहे मंदिरा दे खोल अज माये मैं करने दीदार आ गया,

कर मेरे वी तू सिर उते छावा मैं लेन तेरा प्यार आ गया

मैं करने दीदार आ गया

नंगे नंगे पैरी बड़ी दुरो माये आया हां

पान ते सुपारी नाले भेटा भी ले आया हां,

झंडे चुनिया ते चोला लाल तेरा

लै हार ते शिंगार आ गया

मैं करने दीदार आ गया

दिल बड़ा करदा सी दर्शन पाउन नु

दाती दे द्वारे जाके शीश झुकोन नु

जदों मिलिया सुनेहा दाती तेरा मैं छड कम कार आ गया

मैं करने दीदार आ गया

लेके तस्वीर पूरी दिल विच फिरदा चुगीती दा विनोद माये मुरीद बड़े चिर दा.

पाके नाम तेरे दा चोला मैं अज तेरे द्वार आ गया

मैं करने दीदार आ गया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।