सोनाला रा नाथ हेलो साम्भलो

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॥ पावन पाठ ॥

सोनाला रा नाथ हेलो साम्भलो सोनाला रे मायने भेरूजी रो धाम

दर्शन आवे यात्री भेरू सारे सकल रा काज,

आप रे दर्श कारणे भेरू आया

सोनाला माय दर्शन दीजो

टाबरिया जोवे बाट अरजी सुनजो

थाने जोडा दोनु हाथ अरजी सुनलो

अरे सोनाला रा नाथ हेलो सांभलो ओ जी

अरे सोनाला रा देव हेलो सुनलो

माँ चामुण्डा रा लाल अरजी सुनलो

अरे सोनाला रा देव अरजी साम्भलो ओ जी.....

अरे थारे चढावन कारणे भेरूजी ओ

आज बाकलीया रंदावु हेलो सुनजो

भेरू बाकलीया रंदावु हेलो सुनजो

ओ भेरू ब्राम्हणी रा लाल अरजी सुनलो

अरे सोनाला रा नाथ हेलो साम्भलो ओ जी....

अरे काला रे गोरा वीर खेतला

भक्तो रा आधार हेलो सुनजो

भेरू भक्तो रा आधार हेलो सुनजो

ए थाने जोडु दोनु हाथ हेलो सुनजो

अरे भगतो रा रखवाल हेलो साम्भलो ओ जी.......

अरे माता ब्राह्मणी रा लाल भेरू

भगतो रा रखवाल हेलो सुनजो

ए माँ चामुण्डा रा लाल अरजी सुनलो

ए भगतो रा प्रतीपाल हेलो साम्भलो ओ जी......

अरे लख लख आवे जातरी भेरूजी ओ

आज ध्यावे दिन ने रात अरजी सुनलो

ओ मारा सारंगवा रा नाथ अरजी सुनलो

अरे सोनाला रा वीर हेलो साम्भलो ओ जी.

अरे आपरे दर्श रे कारणे भेरू आया

सारंगवा रे माय दर्शन दीजो

टाबरिया जोवे बाट अरजी सुनजो

थाने जोडा दोनु हाथ अरजी सुनलो

अरे सोनाला रा नाथ हेलो सांभलो ओ जी...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।