गरीबी बहुत बुरी हे माँ शेरावाली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

गरीबी बहुत बुरी हे माँ शेरावाली,

दोडी तो दोडी मैं खाती गई थी

रे सुन भाई खाती के माँ की चोंकी भर दी

जब खाती के पैसे मांगे पैसे तो मेरे पास नही हे माँ शेरावाली,

गरीबी बहुत बुरी हे माँ शेरावाली,

दोडी तो दोडी मैं घुमार के गई थी

रे सुन भाई कुमरे के माँ का दीवना ढड दे

जब कुमरे के पैसे मांगे पैसे तो मेरे पास नही हे माँ शेरावाली

गरीबी बहुत बुरी हे माँ शेरावाली,

दोडी तो दोडी मैं दरजी के गई थी रे

सुन भाई दरजी के माँ का लेहंगा सी दे

जब दरजी के पैसे मांगे पैसे तो मेरे पास नही हे माँ शेरावाली

गरीबी बहुत बुरी हे माँ शेरावाली,

दोडी तो दोडी माँ के द्वार मैं गई थी

झोली तो मेरी भर दे ने हे माँ शेरावाली

जब मैया का दर्शन हो गया गरीबी मेरी दूर हुई हे माँ शेरावाली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।