पल्ला अड़ेया है तेरे दरबार महारानी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पा दे झोली विच खैर तू पा दे मंगते नु खैर

पा दे झोली विच खैर इक वार महारानी

पल्ला अड़ेया है तेरे दरबार महारानी

पा दे झोली विच खैर ....

हासे दुनिया ने खोले मेरे कोलो दातिये,

दस की की लुकावा तेरे कोलो दातिये

बैरी जग कोलो होया हां लचार महारानी

पल्ला अड़ेया है तेरे दरबार महारानी

तेरा हॉवे जे इशारा तर जावा दातिये,

वर नाम वाला तेरे कोलो पावा दातिये

गोदी खेड दा मैं देखा इक लाल महारानी

पल्ला अड़ेया है तेरे दरबार महारानी

मावा पुत्रा दे प्यार नु जहान जांदा

दास फिरदा ऐ माये तेरी खाक छान दा

करदे मेहर दी नजर इक बार महारानी

पल्ला अड़ेया है तेरे दरबार महारानी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।