फागुन में होली खेलु गी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

फागुन में होली खेलु गी मैंने कर ली है फुल तयारी कान्हा मोहे ला दे पिचकारी

तू किनसे होली खेलेगी बतलादे ओ राधा प्यारी मत मंगवावे तू पिचकारी

मैं रंग बहुत सो ले आई

मैंने चार मटकिया घडवाई

मो को तो सब को रंगना है चाहे आवे कोई नर और नारी

कान्हा मोहे लागे पिचकारी

तू किनसे होली खेलेगी बतलादे ओ राधा प्यारी मत मंगवावे तू पिचकारी

तेरो गोरो कात जो रंग जाएगो जो नीलो पीलो पड़ जाएगो

तू तब तक पूरी रंग जायेगी जब आएगी तेरी बारी

मत मंगवावे तू पिचकारी

फागुन में होली खेलु गी मैंने कर ली है फुल तयारी कान्हा मोहे ला दे पिचकारी

तेरी बतिया एक न मानु मैं तोहे कुर्वी अमन रंग डारु मैं

चाहे जो हॉवे सो हो जावे

केशव की है जिमेदारी कान्हा मोहे लादे पिचकारी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।