माँ सरस्वती मुझको वरदान दो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ सरस्वती मुझको वरदान दो मुझको नवल उत्थान दो

माँ सरस्वती मुझको वरदान दो,

मुझको नवल उत्थान दो ,

माँ सरस्वती मुझको वरदान दो,माँ शरदे हंससिनी वागेश वीना वादिनी ,

मुझको अगम स्वर ज्ञान दो,

माँ सरस्वती मुझको वरदान दो,

मुझको नवल उत्थान दो ,

माँ सरस्वती मुझको वरदान दो,माँया मुझको ना तक सके,

मॅन मोह माया ना फस सके,

कर डोर सब अगयाँ दो,

माँ सरस्वती मुझको वरदान दो,

मुझको नवल उत्थान दो ,

माँ सरस्वती मुझको वरदान दो, निष्काम हो मनोकामना,

मेरी सफल हो साधना,

नयी गति नयी ताल हो,

माँ सरस्वती मुझको वरदान दो,

मुझको नवल उत्थान दो ,

माँ सरस्वती मुझको वरदान दो,हो सत्या जीवन सारथि,

तेरी करू नित्या आरती,

संवेधी सच समान हो,

माँ सरस्वती मुझको वरदान दो,

मुझको नवल उत्थान दो ,

माँ सरस्वती मुझको वरदान दो, मन बुद्धि हृदय पावतीत्र हो,

मेरा महान चरित्रा हो,

विद्या विनय बाल दान दो,

माँ सरस्वती मुझको वरदान दो,

मुझको नवल उत्थान दो ,

माँ सरस्वती मुझको वरदान दो,सौ वराश तक जीते रहे,

सच अमीया हम पीते रहे,

निज चरण में स्थान दो,

माँ सरस्वती मुझको वरदान दो,

मुझको नवल उत्थान दो ,

माँ सरस्वती मुझको वरदान दो,यह विश्वा ही परिवार हो,

सब के लिए समाँन प्यार हो,

आदेश लक्ष्या महान दो,

माँ सरस्वती मुझको वरदान दो,

मुझको नवल उत्थान दो ,

माँ सरस्वती मुझको वरदान दो,मुझको नवल उत्थान दो

माँ सरस्वती मुझको वरदान दो,

मुझको नवल उत्थान दो,

माँ सरस्वती मुझको वरदान दो ,

卐 ललित गेरा झज्जर 卐

(SLG Musician)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।