सुर की देवी सरस्वती माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सुर की देवी सरस्वती माँ, सुर की देवी सरस्वती माँ,

सुर का गण सीखा दे माँ,

है अंधियारा इस हृदय में ,

सुर का दीप जला दे माँ

सुर की देवी सरस्वती माँ, सुर की देवी सरस्वती माँ,

रीत ना जानू गीत ना जानू,

प्रीत मैं जानू चरणों की,

रीत ना जानू गीत ना जानू,

प्रीत मैं जानू चरणों की,

ज्ञानी नही अज्ञानी हु मैं ,

साची राह दिखा दे माँ,

है अंधियारा इस ह्रदय में,

सुर का दीप जला दे माँ,

सुर की देवी सरस्वती माँ, सुर की देवी सरस्वती माँ,

पूजा वंदना अर्चना सब कुछ

शब्द सुमन अर्पण माता ,

पूजा वंदना अर्चना सब कुछ

शब्द सुमन अर्पण माता

पूजा वंदना अर्चना सब कुछ

शबाद सुमन अर्पण माता

सुर का गान सीखा दे माँ,

है अंधियारा इस ह्रदय में

सुर का दीप जला दे माँ

सुर की देवी सरस्वती माँ, सुर की देवी सरस्वती माँ,

卐 ललित गेरा झज्जर 卐

(SLG Musician)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।