तांडव गति मुंडन पे नाचत गिरिधारी

संत सूरदास
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तांडव गति मुंडन पै नाचत गिरिधारी,

पं पं पं पग पटकत्,

फं फं फं फननि परत,

बिं बिं बिं विनति करत,

नाग वधु हारी।।

शशिक शशिक शनकादिक्

नं नं नं नारद मुनि,

मं मं मं महादेव,

बं बं बं बलिहारि ,

विविध विविध विधाधर,

दं दं दं देव सकल,

गं गं गं गुनि गंधर्व नाचत दे तारि,

सूरदास प्रभु की वाणी

किं किं किनहु ना जानि

चं चं चं चरण परत,

निर्भय कियो काली,

तांडव गति मुंडन पे नाचत गिरिधारी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।