ना कही हमने श्याम सा देखा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

वसुदेव सुतं देवं कंस चाणूर मर्दनम

देवकी परमानन्दम कृष्ण वन्दे जगतगुरु

छैल जो छबीला , सब रंग में रंगीला

बड़ा चित का अडिला , सब देव तोसे न्यारा है

माला गल सोहे , नाक मोती से तू जोहे

कान कुंडल मन मोहे , लाल मुकुट सिर धारा है

दुष्ट जन मारे , सब संतजन तारे

ताज चित में हमारे , सुख प्रीति करने वारा है

नंद जू का प्यारा , जिस कंस को पछारा

वो ही वृन्दावन वारा , कृष्ण साहिब हमारा है

ना कही हमने श्याम सा देखा

जो भी देखा वो बेवफा देखा

ना कही हमने श्याम सा देखा………..

ध्यान में योगियों के आता नही,

संग भक्तो के नाचता देखा,

जो भी देखा वो बेवफा देखा,

ना कही हमने श्याम सा देखा………..

किस तरह द्रोपदी नग्न होती,

श्याम साड़ी में था छुपा देखा,

जो भी देखा वो बेवफा देखा,

ना कही हमने श्याम सा देखा,

युद्ध में अर्जुन की जीत हो जाये,

उसका रथ आप हाँकता देखा,

जो भी देखा वो बेवफा देखा

ना कही हमने श्याम सा देखा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।