माँ तो माँ होती है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

घर में हो या हो मंदिर में दोनों इक ही ज्योति है

माँ तो माँ होती है भाईया माँ तो माँ होती है

जिस में अपने लाल के उपर है माया बरसाई

हर पित नाम उन्हें भाता है मात कहो या माई

तू जागे तो जागे माता तू सोये तो सोती है

माँ तो माँ होती है भाईया माँ तो माँ होती है

जिस में अपने खून से सींचा अपने लाल का जीवन

सारे गम पीती है माँ खुश हाल हो लाल का जीवन

ममता माँ दो नाम है लेकिन एक सीप दो मोती है

माँ तो माँ होती है भाईया माँ तो माँ होती है

गीले में खुद सोती माँ सूखे में तुझे सुलाया

खुद माँ ने भूखे रेह कर तुझको भर पेट खिलाया

सिंचित होती उसी की भगियाँ ममता जिसे बिगोती है

माँ तो माँ होती है भाईया माँ तो माँ होती है

ढल जाती है राते सारी आँगन में चल चल के

वचपन से तू बड़ा हुआ जिनके साए में पल के

माँ अपने सारे बच्चो के सपने सदा संजोती है

माँ तो माँ होती है भाईया माँ तो माँ होती है

उनके चरण की पूजा करने दिल अपने अन्दर में

जन्मी होती घर की माता जगजनी मन्दिर में

तू हस दे तो हस दे माता तू रोये तो रोती है

माँ तो माँ होती है भाईया माँ तो माँ होती है

माँ से बढ़ कर दुनिया में क्या धीर कोई है प्यारा

ये दे नाम सदा मोरी मैया तकता तेरा द्वारा

माँ बेटे की खुशहाली के सपने सदा पिरोती है

माँ तो माँ होती है भाईया माँ तो माँ होती है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।