बाजी रे बांसुरिया श्याम यमुना के तीर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बाजी रे बांसुरिया स्याम जमुना के तीर

बंसी मधुवन में बाजी,

काम छोड़ सारी सखियां भागी

धुन सुन के मै हो गई राजी नैना बहे नीर

बंसी की धुन परी कानन में

चमक उठी मोरे आंगन में

भाग चली घर से मधुवन में धरे नहीं धीर

बंशी बाज चली बेखटकी

छोड़ चली मैं सिर की मटकी

भूल गई मै सुध औघट की उड़ चल्यो चीर

सीताराम कृस्न गुण गावे

सारी सखियां धुन सुन आवें

मधुर मधुर मोहन मुसकावे मिटे भव पीर

द्वारा योगेश तिवारी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।