जाओगे जब द्वार मैया के

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जाओगे जब द्वार मैया के मैया से मेरी भी केहना,

शाम सुबह और रेहना,

जाओगे जब द्वार मैया के

जन्म जन्म की आस है मैया दर्शन तेरा पाऊ मैं

दर्शन तेरा पा के आंबे जन्म सफल कर जाऊ मैं

अब तो बुलाले मात भवानी करदे किरपा मुझपर माँ

जाओगे जब द्वार मैया के

अब तो तुझसे इक पल आंबे दूर मैं न रेह पाऊंगा

तू को इशारा कर दे आंबे नंगे पाओ मैं आऊंगा

उचे पर्वत तेरा है रस्ता आंबे बुला ले मन है तरस ता,

जाओगे जब द्वार मैया के

माँ दुर्गा को बुल गई तू पूछते है चन के रोते नैना

तुझको देखे बिन मुझको अब आये न इक पल भी चैना,

रोते रोते बिबश है बिता रोते हो रोते ये बीते न नैना

जाओगे जब द्वार मैया के

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।