ऐ जीवन दाता सुन हम शरण पड़े तेरे

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॥ पावन पाठ ॥

ऐ जीवन दाता सुन हम शरण पड़े तेरे

तुम जग के मात पिता हो हम बालक है तेरे

ऐ जीवन दाता सुन हम शरण पड़े तेरे

कोई जग में नही तुम सा ओ प्यार के सागर हो

फिर भी क्यों ये जग दाता मेरी खाली गागर हो

जिन कर्मो से तुम मिलो ऐसे कर्म बने मेरे

तुम जग के मात पिता हो हम बालक है तेरे

ऐ जीवन दाता सुन हम शरण पड़े तेरे

इस जग में है हम अकेले तुम साथी हमारे हो

ओ जग के पालनहारी हारे के सहारे हो

ओ सुन जग के माली हम सब फूल है तेरे

तुम जग के मात पिता हो हम बालक है तेरे

ऐ जीवन दाता सुन हम शरण पड़े तेरे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।