ओ माँ मेरी पत्त रखिओ सदा लाटां वालीए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ओ माँ मेरी पत्त, रखिओ सदा लाटां वालीए

दुखीआ को, पापन को, दे दे सहारा

तेरा मंदिर है न्यारा, मुझे भी दे उजिआरा

मिटे मन का अँधिआरा,

ओ माँ मेरी, ओ माँ मेरी

मोह माया के तोड़ के बंधन,

तेरे द्वारे आ गई जोगण

कोई नहीं ऐ मेरा, तेरे सिवा लाटां वालीए,

कोई नहीं ऐ मेरा,,,,

कोई नहीं ऐ मेरा, तेरे सिवा लाटां वालीए,

मैं दुखिआरी, शरण तिहारी, झोली है ख़ाली

मैं आई बनके सवाली, ओ माता लाटां वाली,

ओ ऊंचे मँदिरा वाली, ओ माँ मेरी पत्त,,,,,,,,,

सूनी सूनी गोद भरे तू,

माता सब के कष्ट हरे तू

कोई नहीं ऐ मेरा, तेरे सिवा लाटां वालीए

कोई नहीं ऐ मेरा,,,,

कोई नहीं ऐ मेरा, तेरे सिवा लाटां वालीए,

पूजा के, श्रद्धा के, जो फूल लाए

वो जो मांगे सो पाए, तूँ विगड़ी बात बनाए,

तूँ सब के भाग जगाए, ओ माँ मेरी पत्त ,,,,,,,,,,,,,

माता तूँ है शक्तिशाली,

जग्ग में तेरी ज्योत निराली

कोई नहीं ऐ मेरा, तेरे सिवा लाटां वालीए

कोई नहीं ऐ मेरा,,,,,

कोई नहीं ऐ मेरा, तेरे सिवा लाटां वालीए,

युग युग से, भक्तों के, दुखड़े निवारे

शहंशाह आए द्वारे,और जैसे अटक नज़ारे,

तेरी शक्ति से हारे, ओ माँ मेरी पत्त ,,,,,,,,,,,

तूँ विगड़ी बात बनाए, तूँ सब के भाग जगाए

ओ माता लाटां वाली, ओ ऊंचे मँदिरा वाली

ओ माता लाटां वाली,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।