माँ को हमसे प्यार कितना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ को हम से प्यार कितना

ये हम नही जानते मगर जी नही सकते माँ के बिना

नो माह में कोख में अपनी सुलाती है माँ

बुरी हर नजर से हम को बचाती है माँ

क्या कुछ नही करती माँ बच्चो के लिए

माँ को है ख्याल कितना ये हम नही जानते

मगर जी नही सकते माँ के बिना

अपनी माँ के दिल को दुखाते है लोग

दर दर की ठोकरे खाते है लोग

तडपते है सारी उमर वो माँ के बिना

मैं के एहसान कितने ये हम नही जानते

मगर जी नही सकते माँ के बिना

दास मेहर की माँ से पेहचान है

मेरे लिए माँ मेरी भगवान है

चूका न सकुगा कर्ज अपनी माँ का

माँ को है दुलार कितना ये हम नही जानते

मगर जी नही सकते माँ के बिना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।