आरती बाबा बालक नाथ जी

पारंपरिक
माँ गंगा आरती बाबा बालक नाथ भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

सोने की थाली में, गंगा जल गड़वा,

चंदन की चौकी पे, बिठाए सिद्ध जोगी l

धूप दीप तेरी, ज्योत जला के,

आरती तेरी हम, गाएं सिद्ध जोगी ll

धूणे वाले साईं तेरी आरती l

चिमटे वाले जोगी तेरी आरती l

तलाईआं वाले बाबा तेरी आरती l

दुधाधारी जोगी तेरी आरती l

अमर कथा को सुन के, 'हुई अमर काया' l (जोगी)

सतयुग द्वापर त्रेता, 'कलयुग में माया' l (तेरी)

पा के दर्शन दर से l मानस देह थी तारी,,,

धूणे वाले साईं तेरी आरती l

चिमटे वाले जोगी तेरी आरती l

पिता तुम्हारे है विष्णु, 'लक्ष्मी जी माता' l (तेरी)

बाल अवस्था में तोड़ा, 'मात पिता से नाता' l (जोगी)

ज़ूनागढ़ गुजरात में l आए अवतारी,,,

चिमटे वाले जोगी तेरी आरती l

तलाईआं वाले बाबा तेरी आरती l

धूणा अखण्ड था शिव का, 'तुन्हे ही तपाया' l (जोगी)

दूर से शिव ही लगे, 'जिस भी दरस पाया' l

सिद्ध दियोट गुफ़ा तेरी l लीला है न्यारी,,,

तलाईआं वाले बाबा तेरी आरती l

दुधाधारी जोगी तेरी आरती l

सर पे वाल सुनहरी, 'सूरत अति प्यारी' l (भोली)

कच्छ झोली हथ चिमटा, 'मोर की है सवारी' l (तेरी)

पाँव खड़ाएं गले सिंगी l नाथ कलाधारी,,,

धूणे वाले साईं तेरी आरती l

चिमटे वाले जोगी तेरी आरती l

संत भगत करे सेवा, 'देव भी बलिहारी' l (जोगी)

तुमरी महिमा गाएं, 'यह सृष्टि सारी' l

सर्व कला सम्पूर्ण l बालक ब्रह्मचारी,,,

चिमटे वाले जोगी तेरी आरती l

तलाईआं वाले बाबा तेरी आरती l

श्रद्धा भक्ति पूर्ण, 'तभी हमरी होगी' l (जोगी)

आओ भोग लगाओ, 'रोट दूध का जोगी' l

हाथ जोड़ चरणों में l खड़े तेरे पुज़ारी,,,

धूणे वाले साईं तेरी आरती l

चिमटे वाले जोगी तेरी आरती l

सिद्ध जोगी की आरती, 'नेम से जो गए' l (जोगी)

बाबा पौणाहारी से, 'मन वांछित फल पाए' l

चरण कमल तेरे कोमल l दास है बलिहारी,,,

धूणे वाले साईं तेरी आरती l

चिमटे वाले जोगी तेरी आरती l

तलाईआं वाले बाबा तेरी आरती l

दुधाधारी जोगी तेरी आरती l

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।