कर्मो के लेखो से कब तक

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॥ पावन पाठ ॥

कर्मो के लेखो से कब तक तुम खुद को बचा ना पाओगे

एक न एक दिन तो कर्मो लेखो को सामने पाओगे

कर्मो के लेखो से कब तक तुम खुद को बचा ना पाओगे

फूलो की तमन्ना रखते हो काटो का गुलिश्तां मिलता है

काटो का गुलिश्तां मिलता है संग कर्मो का लेखा चलता है

जो बोया है वही काटोगे जो बोया है वही काटोगे

कब तक ये बात ना मानोगे

कर्मो के लेखो से कब तक तुम खुद को बचा यूं पाओगे

एक न एक दिन तो कर्मो लेखो को सामने पाओगे

कर्मो के लेखो से कब तक तुम खुद को बचा ना पाओगे

तुम लाख करो कोशिश मगर सच सामने आकर रहता है

सब राज यहाँ खुल जाता है

कभी झूठ नहीं सच बन सकता कभी झूठ नहीं सच बन सकता

तुम खुद बा खुद झुक जाओगे

कर्मो के लेखो से कब तक तुम खुद को बचा यूं पाओगे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।