आया आया सांवरिया है बन के चोर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आया आया सांवरिया है बन के चोर

आया आया है बन के चोर

समज न पाऊ कैसे बताऊ

डर है कही देखे न और

के डर गई मैं मर गई मैं

आया आया सांवरिया है बन के चोर

खड़ा है वो नीचे खिड़की के पीछे

उंगली है खीचे दर से मैं हो गई वनवारी

गोरी से मैं हो गई सांवली

मन में तो है न ये रात बीते

बाँध लू रात मैं न होने दू भोर

के डर गई मैं मर गई मैं

आया आया सांवरिया है बन के चोर

उसे न जाने दो ना हाथ छुडाने दो

मन ये केहता है यही पे हमेशा वो रहे

तन मन मेरा ये कहे

मन में समाये मनवा चुराए नाचू मैं सारी रात बन जाऊ मोर

के डर गई मैं मर गई मैं

आया आया सांवरिया है बन के चोर

नैना मत वारे काले कजरारे जादू है डारे,

खिचती सी जाऊ क्या करु सोच न पाऊ क्या करू

दिल को चुराने आया है शायद जेवर चुराता तो मचा देती शोर

के डर गई मैं मर गई मैं

आया आया सांवरिया है बन के चोर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।