अब सौंप दिया इस जीवन का सब भार तुम्हारे हाथों में

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में।

है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में॥

मेरा निश्चय बस एक यही, एक बार तुम्हे पा जाऊं मैं।

अर्पण करदूँ दुनिया भर का सब प्यार तुम्हारे हाथों में॥

जो जग में रहूँ तो ऐसे रहूँ, ज्यों जल में कमल का फूल रहे।

मेरे सब गुण दोष समर्पित हों, करतार तुम्हारे हाथों में॥

यदि मानव का मुझे जनम मिले, तो तव चरणों का पुजारी बनू।

इस पूजक की एक एक रग का हो तार तुम्हारे हाथों में॥

जप जब संसार का कैदी बनू, निष्काम भाव से करम करूँ।

फिर अंत समय में प्राण तजूं, निरंकार तुम्हारे हाथों में॥

मुझ में तुझ में बस भेद यही, मैं नर हूँ तुम नारायण हो।

मैं हूँ संसार के हाथों में, संसार तुम्हारे हाथों में॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।