भोलेनाथ मेरे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोलेनाथ मेरे भोलेनाथ मेरे

महाकाल मेरे महाकाल मेरे

भोलेनाथ मेरे भोलेनाथ मेरे

महाकाल मेरे महाकाल मेरे

भोलेनाथ मेरे भोलेनाथ मेरे

महाकाल मेरे महाकाल मेरे

भोलेनाथ मेरे भोलेनाथ मेरे

महाकाल मेरे महाकाल मेरे

सावन का महिना आया

भोले की मस्ती में छाई

जटा से जिसके निकले है गंगा

भोले की मस्ती में

डम डम डम डम डमरू बाजे

भोले के नाम से निकली है दुनीया सारी

सरे कष्टों के पलन हरे

भोले तेरे शोंक निराले

कही चिलम कही विश के प्याले

क्या दूनिया में तेरे खेल

मेरे रोम रोम में शिव शंभु डमरू वाले

भोलेनाथ मेरे नाथ मेरे....

भोलेनाथ मेरे नाथ मेरे ...

भोलेनाथ मेरे नाथ मेरे .....

भोलेनाथ मेरे नाथ मेरे ....

बाबा महाकाल के भक्त है

हर हाल में मस्त है

ज़िन्दगी एक धुआ है

हम चिलम में मस्त है

आंख मीच कर खीच ले

भांग का पायला फुक ले

भोले की मस्ती में थोडा सा दुभ ले

भोले के हम भक्त हैं

तबहि तो हम मस्त है

महाकाल के नारे में

थोडा सा हम व्यस्त है

चल रहा हु धुप में

थो महाकाल की छया

शरण है तेरी साची

बकि सब मोह माया

इसके बिना ना कोई ज्ञान

सुबह हो मेरे श्याम

बस महाकाल पार ध्यान

अधूरी हर शिक्षा

असुर ब्रह्माण्ड

त्रिलोक की है स्वामी

जय महाकाल जय महाकाल ...

भोलेनाथ मेरे नाथ मेरे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।