पता नही जी भोला क्या नशा करता है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पता नही जी भोला क्या नशा करता करता है

जब नाम लिया मैंने भोले नाथ का काम मेरा वोही तो करदा

कदे भांग पिए कदे चिलम पीये भोला मेरा मस्त मलंगा

बम बम भोले भोले बम बम भोले भोले

पता नही जी भोला क्या नशा करता है

अपने भगतो से ये वफा करता है

दुःख के सारे अब तो मेरे दिन चले गए

जब से भोला मेरा मेरे दिल में वसता है

नही जानता ये मेरी ये कहानी कोई

मेरे भोले जैसा जग में वरदानी न कोई

भोला करता है काम सब भगतो का जो भी भोले का हुका भरता

कदे भांग पिए कदे चिलम पिए भोला मेरा मस्त मलंगा

जो बम बम गाये गा भोले को मनायेगा

भोला इतना भोला उसे अपना बनाये गा

इक लोटा जल का जो भोले पे चडायेगा

जो मन में ईशा हो उसे वो मिल जायगा

मेरे भोले की अमर कहानी वोही

सोने की लंका रावन को दान में देई

बसमा सुर को ऐसा वरदान दे दिया

जिस के सिर पे हाथ धरे वो ही मरदा

कदे भांग पिए कदे चिलम पिए भोला मेरा मस्त मलंगा

सिंगर लेखक गोपाल वर्मा रेवाड़ी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।