सब से अच्छी सब से प्यारी मेरी साईं माँ

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॥ पावन पाठ ॥

जिस ने सजाई खुशियाँ हमारी जिस ने बसाया जहान,

सब से अच्छी सब से प्यारी मेरी साईं माँ

मन मंदिर की मूर्त तुम हो मैं इक प्रेम पुजारी

माँ का अंचल माँ की ममता पाई तुमसे सारी,

बदले चाहे दुनिया सारी बस बदलो तुम ना

सब से अच्छी सब से प्यारी मेरी साईं माँ

चरणों में है साईं तुम्हारे सब नदियों का संगम

गीत भजन सुर साज तुम्ही से तुम से माँ सरगम

चरणों में है साईं तुम्हारे सब नदियों का संगम

गीत भजन सुर साज तुम्ही से तुमसे माँ सरगम

धर्म कर्म गुण गान तुम्ही से सब तुमसे जन्मा

सब से अच्छी सब से प्यारी मेरी साईं माँ

तुजमे मुझमे दिल धडकन सा इक अटूट सा रिश्ता

मात पिता गुरु भगवन और तुम ही नेक फ़रिश्ता

मैं अभूद अज्ञानी बालक करना भूल छमा.

सब से अच्छी सब से प्यारी मेरी साईं माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।