सत्य साईं की माता

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन साईं भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

त्रेता में माँ कोश्यला द्वापर में यशोदा माता

कलयुग में माँ इश्वर्म माँ सत्य साईं की माता

जन्म जन्म का नाता माँ से

भव सागर में नव महीने रहे सीप से जन्मा मोती

सत्य धर्म और शान्ति प्रेम की जागी जग में ज्योति,

राम कृष्ण के बाद मिला है फिर से एक विध्याता

कलयुग में माँ इश्वर्म माँ सत्य साईं की माता

जन्म जन्म का नाता माँ से

बचपन से ही माँ को सारे चमत्कार दिखलाए

खेल खेल में सत्ये साईं ने विपद रूप दरशाए

चोदावरसो तक अम्मा का आंगन रहा सजाता

कलयुग में माँ इश्वर्म माँ सत्य साईं की माता

जन्म जन्म का नाता माँ से

राम कृष्ण की तरह साईं ने माँ को ये बतलाया

सेवा और उपकार की खातिर मैं इस जग में आया

अंत समय में माँ ने स्वामी केह कर माना दाता

कलयुग में माँ इश्वर्म माँ सत्य साईं की माता

जन्म जन्म का नाता माँ से

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।