गल माये मेरिये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

निक्की जही मन ले तू गल माये मेरिये

दुखा मेरेया दा कर हल माये मेरिये

पेहला दुःख मुकदा नही दूजा दभ लैंदा ऐ

पता नही घर मेरा किथो लभ लैंदा ऐ,

होर दुःख नहियो हुँदै झल माये मेरिये

दुखा मेरेया दा कर हल माये मेरिये

थक गया ठोकरा ते ठेडे माये खा के

तू भी कदे पूछेया न हाल मेरा आ के

इक वारी तक मेरे वल माये मेरिये

दुखा मेरेया दा कर हल माये मेरिये

तेरे सिवा दुःख किसे होर नु सुनाना नही

तेरे बिना किसी मेनू गल नाल लाना नही

आवे तेरी याद हर पल माये मेरिये

दुखा मेरेया दा कर हल माये मेरिये

आस लैके आया साहिल आस माये तोड़ी न

करी न निराश मेनू खाली माये मोडी न

हूँ न तू करी अज कल माये मेरिये

दुखा मेरेया दा कर हल माये मेरिये

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।