अरे माता का जगराता भैया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अरे माता का जगराता भैया

दर्शन देने आई मैया आज पूरी रात जागो रे

अम्बर वो धरती ये चाँद वो तारे जय मैया जय मैया बोले सारे

भगती में डूबा है आलम सारा भगत लगा लो जय कारा

जिस ने भी मन से है मैया को पुकारा शेरावाली मैया ने दिया है सहारा

शेर पे सवार मैया जगराते में आई मैया मन से मुरादे मांगो रे

अरे माता का जगराता भैया

मन में श्रदा लेकर आये हम बचे है तेरे माये

मिल कर तेरी महिमा गाये अपना जीवन धन्य बनाये

चुनरी बांधे सिर पे सारे भक्त इस पे डूबे सारे माँ की महिमा गाओ रे

अरे माता का जगराता भैया

चाँद चाडे गा रात चड़े गी दरबार की शान बड़े गी

जग मग ज्योत जले है नैनो को पावन ये लगे है

गाऊ जब तक होए सवेरा दर्शन मिले न तेरा मैं तो रुक न पाऊ रे

अरे माता का जगराता भैया

माँ तुम से है इतनी विनती दुर्गा की भगतो में करलो गिनती

दुःख सुख अपना माँ तुम से है यो अपना याहा तुम से है

दुखियो के दुःख हरने वाली भेरो मदन करने वाली माँ की भेट गाओ रे

अरे माता का जगराता भैया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।