चला गया वो चला गया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सब की आँखों में आंसू दे कर वो चला गया

आँख का तारा चंचल प्यारा चला गया

माता रानी और चंचल कभी अलग नही लगते थे

रात रात भर दोनों ही जगराते में जग ते थे

रोज बुलाता था वो माँ को माँ ने उसको बुला लिया

चला गया वो चला गया

जगराते अब भी होंगे माता रानी भी होंगी

लेकिन तेरे पूत की माता जगराते में कमी होंगी

भगतो में भगत वो सरोमनी छोड़ के हम को चला गया

ऐसे भगत मरा नही करते पल पल याद सताए गी

माँ के साथ में तेरी भी अब कथा अमर हो जायेगी

माँ क्या होती है जीवन में सार सभी को बता गया

चला गया वो चला गया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।