जगत में सबसे बड़ी है माँ

पारंपरिक
माँ गंगा भजन विविध भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

जगत में सबसे बड़ी है माँ

अरे पगले जगत में सबसे बड़ी है माँ

जिसने तुझको पाला पोसा

उससे बड़ा और क्या ...

जगत में सबसे बड़ी है माँ

नौ महीने तक कष्ट उठाये

लोरी देकर तुझे सुलाए

नहलाये मलमूत्र उठाये

पेट काट कर तुझे खिलाये

इससे बड़ा और क्या...

जगत में सबसे बड़ी है माँ

माँ की ममता पाक दीवानी

जैसे है गंगा का पानी

उस इंसा की क्या जिंदगानी

जिसने माँ की कदर ना जानी

ओ नर नहीं है शैतान..

जगत में सबसे बड़ी है माँ

माँ को छोड़ तू हुआ बेगाना

ढूंढ लिया क्या नया ठिकाना

तूने माँ का दर्द ना जाना

अपने सुख में हुआ दीवाना

जरा होश में आ इंसान...

जगत में सबसे बड़ी है माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।