गुरू वो साँवरी सूरत हमें फिर कब दिखाओगे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन गुरुदेव भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

गुरू वो साँवरी सूरत हमें फिर कब दिखाओगे

बिरह की आग ने हमारा जलाया हैं बदन सारा

गुरू के प्रेम पानी से जलन वो कब बुझाओगे

गुरू वो साँवरी सूरत हमें फिर कब दिखाओगे...

सुधि खाने व पीने की रही हमको न सोने की

प्यास दर्शन की हैं मन में गुरूजी कब दिखाओगे

गुरू वो साँवरी मूरत हमें फिर कब दिखाओगे...

फिरे दिन रैन हम रोती वो वृंदावन की कुँजन में

मनोहर बाँसुरी की धुन हमें फिर कब सुनाओगे

गुरू वो साँवरी सूरत हमें फिर कब दिखाओगे...

न हमको योग से मतलब न मुक्ति की हमें चाह

वो ब्रह्मानंद सदगुरू से हमें फिर कब मिलाओगे

गुरू वो साँवरी सूरत हमें फिर कब दिखाओगे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।