तेरी याद सताएगी चंचल

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माता का भकत था एक सीधा साधा और नेक जाना था चला गया,

हम सबको छोड़ के वो दिल सबका तोड़ के वो जाना था चला गया

माता आई होगी खुद लेने बच्चे को बदली छाई होगी

कुछ दिखे नही हम को

वो ले गई होंगी माँ तू भी था उस की जान

जाना था चला गया

जगराते भी होंगे और चोंकी भी होगी

इक तू ही नही होगा बस तेरी कमी होगी

हर वक़्त रहेगा जख्म कितना भी करो मरहम

जाना था चला गया

जब याद सताये गी आँखों को रुलाएगी

भजनों से तेरे चंचल माँ धीर बंधाये गी

जो माँ की मर्जी थी शायद मेरी अर्जी थी

जाना था चला गया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।