चुनर मेरी नयी नयी कान्हा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चुनर मेरी नयी नयी कान्हा अरे मत इसपे तुम रंग डारो,

अरे रे मत करो मने परेशान सांवरियां मुझपे जरा ध्यान दो

चुनर मेरी नयी नयी कान्हा अरे मत इसपे तुम रंग डारो,

राधे मत हॉवे परेशान चुनर तने आज मैं नई दिला दू

ब्रिज में होरी खेले आज मैं तेरा रंग से अंग खिला दू

राधे मत हॉवे परेशान चुनर तने आज मैं नई दिला दू

श्याम मेरा रंग गोरा चिता तू इस पे मत मारे छिट्टा

मुखड़े पे जब रंग डारे मेरा छुट जावेगा टिका

भोली सी इस राधा पे सांवरियां ना पिचकारी मारो

चुनर मेरी नयी नयी कान्हा अरे मत इसपे तुम रंग डारो,

इतना मत कर तू रम झोल अरी पानी में तू रंग गोल

अज तू प्रेम से रंग लग वा ले ना कर तू प्यारी टाल मटोल

मैं तेरे आकर सुन प्यारी अरी बंजर में फूल खिला दू

राधे मत हॉवे परेशान चुनर तने आज मैं नई दिला दू

तने के लेंना मेरे से बता दे साफ़ साफ़ छलिया,

करे रगडा रगड़ी संग में पड़ा दे तूने प्गलियाँ,

श्याम मेरा रंग हो जावे हो अरे गोर से कालो

चुनर मेरी नयी नयी कान्हा अरे मत इसपे तुम रंग डारो,

अरी इस रंग ना डारु मैं मिलका के सिर में रंग प्यारी

के वनवारी संग राधा के खेल के होली खेले नर नारी

के मोहन शर्मा संग में आज तने मैं ब्रिज के खेल खिला दू

राधे मत हॉवे परेशान चुनर तने आज मैं नई दिला दू

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।