ओ माई सबसे बडी है तू

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ तेरा जाप भंवर से निकल देता है

जो भी गिरते है उनको संभाल देता है

ए लोग रहती है मेरे साथ मेरी मां की दुआ

मै डूबती हु तो समंदर उछाल देता है

तेरा जलवा चारो ओर दिखायी देता है

तेरा नाम जो दिल से ले ले सहाई देता है

तुही भरती सभी के मां भंडारे

हमरे जीवन में करदो माँ उजियारे

तेरे दरबार क्या सारी दुनिया में माँ

फैली है तेरी ही तेरी खुशबू

ओ माई सबसे बडी है तू....

बडी है तू बडी है तु ओ माई सबसे बडी है तू

तूने जग को दिया राम भगवान माँ

तूने जग को दिया कृष्णा भगवान माँ

सारी दूनिया में देखो अलग है मकाम

सारी दूनिया मै तेरी अलग शान मां

पत्थरो को भी जीवन अदा कर दे

माँ तू जिसके लिए भी दुआ करदे

उसकी पूरी ही होती माँ आरजू

उसकी पूरी ही होती माँ आरजू

ओ माई सबसे बडी है तू ...

माँ है ऐसा करिश्मा ना देखा सुना

जाल ऐसा किसी ने नही है बुना

जो ये काले भवर के मकड़ जाल है

ईश्वर ने इन्हें ऐसा कही ना चुना

इसके आगे रे जो भी झुका ले सर

उसका नाम रे हो जायेगा अमर

जिसको मिल जाये जन्नत की पावन रे धुल

ओ माई सबसे बडी है तू ....

बडी है तू बडी है तु ओ माई सबसे बडी है तू

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।